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Rakesh Kumar Lal : Blogs

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याकूब

श्रंउमे 3रू3
ठमीवसकए ूम चनज इपजे पद जीम ीवतेमेश् उवनजीेए जींज जीमल उंल वइमल नेय ंदक ूम जनतद ंइवनज जीमपत ूीवसम इवकलण् जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं।
श्रंउमे 3रू4
ठमीवसक ंसेव जीम ेीपचेए ूीपबी जीवनही जीमल इम ेव हतमंजए ंदक ंतम कतपअमद व िपिमतबम ूपदकेए लमज ंतम जीमल जनतदमक ंइवनज ूपजी ं अमतल ेउंसस ीमसउए ूीपजीमतेवमअमत जीम हवअमतदवत सपेजमजीण् देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचंड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
श्रंउमे 3रू5
म्अमद ेव जीम जवदहनम पे ं सपजजसम उमउइमतए ंदक इवंेजमजी हतमंज जीपदहेण् ठमीवसकए ीवू हतमंज ं उंजजमत ं सपजजसम पितम ापदकसमजी! वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती हैः देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है।
श्रंउमे 3रू6
।दक जीम जवदहनम पे ं पितमए ं ूवतसक व िपदपुनपजलरू ेव पे जीम जवदहनम ंउवदह वनत उमउइमतेए जींज पज कमपिसमजी जीम ूीवसम इवकलए ंदक ेमजजमजी वद पितम जीम बवनतेम व िदंजनतमय ंदक पज पे ेमज वद पितम व िीमससण् जीभ भी एक आग हैः जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवच में आग लगा देती है और नरक कुंड की आग से जलती रहती है।
श्रंउमे 3रू7
थ्वत मअमतल ापदक व िइमंेजेए ंदक व िइपतकेए ंदक व िेमतचमदजेए ंदक व िजीपदहे पद जीम ेमंए पे जंउमकए ंदक ींजी इममद जंउमक व िउंदापदकरू क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगनेवाले जन्तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
श्रंउमे 3रू8
ठनज जीम जवदहनम बंद दव उंद जंउमय पज पे ंद नदतनसल मअपसए निसस व िकमंकसल चवपेवदण् पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रूकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
श्रंउमे 3रू9
ज्ीमतमूपजी इसमेे ूम ळवकए मअमद जीम थ्ंजीमतय ंदक जीमतमूपजी बनतेम ूम उमदए ूीपबी ंतम उंकम ंजिमत जीम ेपउपसपजनकम व िळवकण् इसी से हम प्रभु और पिता की स्तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्वरूप में उत्पन्न हुए हैं ाप देते हैं।
श्रंउमे 3रू10
व्नज व िजीम ेंउम उवनजी चतवबममकमजी इसमेेपदह ंदक बनतेपदहण् डल इतमजीतमदए जीमेम जीपदहे वनहीज दवज ेव जव इमण् एक ही मुंह से धन्यवाद और ाप दोनों निकलते हैं।
श्रंउमे 3रू11
क्वजी ं विनदजंपद ेमदक वितजी ंज जीम ेंउम चसंबम ेूममज ूंजमत ंदक इपजजमतघ् हे मेरे भाइयों, ऐसा नही होना चाहिए।
श्रंउमे 3रू12
ब्ंद जीम पिह जतममए उल इतमजीतमदए इमंत वसपअम इमततपमेघ् मपजीमत ं अपदमए पिहेघ् ेव बंद दव विनदजंपद इवजी लपमसक ेंसज ूंजमत ंदक तिमेीण् क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलता है? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।।

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Rakesh Kumar Lal

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