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Vishnu Khare : Blogs

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राष्ट्र सम्मान : आत्म सम्मान

बहुत दिनों के बाद १० नवम्बर को मैं सपरिवार सिनेमा देखने गया . इस बार जो सीट मिली उसका नंबर था ऐ ६ से ऐ ९ . यानी सबसे पीछे वाली लाइन में . यह लाइन सिनेमा देखने के लिए सबसे अच्छी होती है इसमें बैठने पर सबसे अच्छा दिखता है एक खूबी यह भी है कि इसमें बैठकर आप सब देखने वालों को देख सकते हैं किन्तु आपको कोई नहीं देख सकता
सिनेमा शुरू होने वाला था . कुछ विज्ञापन और ट्रेलर दिखाए जा रहे थे.फिल्म शुरू होने के ठीक पाहिले स्क्रीन पर लिखा हुआ सन्देश आया please stand for national anthem. हमेशा की तरह हम चारो खड़े हो गए . अब जन गन मन की धुन शुरू हुई और तमाशा शुरू हुआ .
हमें खडा देख हमारे बगलवाले खड़े हो गए . कुछ हलचल देखकर उनके सामने वाले फिर उनके सामने वाले आदि आदि . इसी बीच एक प्रायमरी स्कूल की उम्र का लड़का जो जल्दी जल्दी चलकर आ रहा था वह मेरे पास आकर बीच रस्ते में ही अट्टेंशन की मुद्रा में खडा हो गया. अपनी सीट पर नहीं गया.
किन्तु सामने की ओर बैठे हुए चार "सज्जन" की हरकत देखते ही बनती थी. उन्होंने पहिले अपनी दाहिनी ओर देखा फिर बाईं ओर देखा फिर पीछे देखा . इनमे से एक ने उठने का प्रयास सा किया . पर उठा नहीं . फिर दुबारा पीछे देखा . अब तक अधिकाँश लोग खड़े हो चुके थे तब इनमे से दो खड़े हो गए ..दो फिर भी बैठे ही रहे .. और इस प्रकार जन गन मन की धुन पूर्ण हुई..
बड़ा आश्चर्य हुआ इस प्रवृत्ति को देखकर ..क्या हमें अपने राष्ट्र ध्वज का सम्मान भी दाहिने-बाएं देखकर करना पडेगा या यह अपने आप स्वविवेक से जागृत हो सकेगा...
स्वतंत्र देश का स्वतंत्र नागरिक यदि इसे कहते है तो लानत है.....

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Vishnu Khare

Public & Government Service

Madhya Pradesh ,  INDIA

1988 Civil Engineer ; Master of Planning 1991 SPA New Delhi; currently working as city planner, Gwalior. Fond of light old and slow music. fellow member of Institute of town planners india(ITPI),life member of indian society of remote sensing

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