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बीता कल बदलिए


क्या आप अपना बीता हुआ कल बदल सकते है? आप कहेंगे, हर्गिज नहीं और इसमें किसी बहस की भी गुंजाईश नहीं। बिल्कुल, मैं सहमत हूँ आपसे लेकिन केवल सैद्धान्तिक रूप से। व्यावहारिक रूप से आप अपने बीते कल को भी बदल सकते हैं। एक मिनट, मेरी बात तो पूरी होने दीजिए। उस पर सहमत या असहमत होना तो आपका विशेषाधिकार है ही।

पहले तो बात करते हैं ये 'बीता कल' होता क्या है? बीता कल वो यादें हैं जिनकी छाप आज भी हमारे जेहन में मौजूद है। ऐसा कुछ जिसने हमारे निर्णयों को प्रभावित किया, जिससे हमारे जीवन की दिशा ही बदल गई। ये हमारा पूरा अतीत नहीं बस कुछ खास यादें भर होती हैं।बचपन से लगाकर आज तक की यादों के इस झुण्ड को ही तो हम अपना बीता हुआ कल कहते हैं। आप गौर करेंगे तो पाएँगे कि ये यादें अमूमन या तो उन पलों की होती है जिनके बारे में हम सोचते हैं कि मैं ऐसा नहीं वैसा कर लेता या उन व्यक्तियों की जिन्होंने हमारे विश्वास का गलत फायदा उठाया। बस यहीं रूककर सोचने कि जरुरत है। क्या हमने सचमुच अब तक कुछ ऐसा नहीं किया जिस पर हम अपने आप पर गर्व कर सकें या क्या हमें जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जिसे याद कर आज भी मन भीग जाता हो? ऐसा हो ही नहीं सकता। मैं और आप ही नहीं दुनिया के हर व्यक्ति ने बहुत कुछ ऐसा किया है और ऐसे कई व्यक्तियों से मिला है। हाँ, ये बात सही है कि वे उस समय याद नहीं आते जब हम अतीत में गोते लगा रहे होते हैं क्योंकि अतीत में आदमी गोते तब लगता है जब वो अपने वर्तमान से खुश नहीं होता और तब उसे कोसने को कोई तो चाहिए होता है। अब जब कोसना हो तो अच्छी बातें याद आने से रहीं।

इन सब के बीच ये समझना भी बहुत जरुरी है कि आखिर हम अपने अतीत को बदलना ही क्यूँ चाहते हैं? देखिए, आप तो जानते ही हैं कि हर क्षण हमारे सामने ढेरों विकल्प लेकर प्रस्तुत होता है। यानि अभी हम क्या-क्या कर सकते हैं इसके खूब सारे ऑप्शन्स हमारे पास होते है। उनमें में से किसी एक को हम चुनते हैं। जिस विकल्प को हम चुनते है वो तय करता है कि आने वाले क्षण में हमारे पास क्या-क्या विकल्प होंगे। पर ये बात तो आप मानेंगे ना कि अभी हम क्या करें ये हमारे मूड पर डिपेंड करता है। जैसा हमारा मानसिक वातावरण होता है हम वैसा ही विकल्प चुनते हैं। तो जरुरी है अपने मानसिक वातावरण का ध्यान रखना। ये हमेशा बिल्कुल कश्मीर की वादियों की तरह बने रहना चाहिए। इससे न केवल हमारा आज सुन्दर होगा बल्कि कल भी बेहतरीन। हमारी यादें, हमारा बीता हुआ कल हमारा मानसिक वातावरण बनाता है और इसीलिए उसका बदलना बहुत जरुरी हो जाता है।

मैं आपको एक छोटा सा अभ्यास सुझाता हूँ। अपने पूरे अतीत को एक पोटली में समझिए। अब सबसे पहले तो उन सारी बातों को इस पोटली में वापस डाल दीजिए जिसे आप अपना बीता हुआ कल कहते हैं। अब इस पोटली में से उन घटनाओं और व्यक्तियों को निकालिए जिन्हें याद करते ही आपका ईश्वर को धन्यवाद करने का मन करता है। यदि आप कागज पर लिखकर करें तो ये आपके जेहन में ज्यादा पक्के से उकर जाएगी। आप ऐसा करते-करते ही अपना मन अच्छा होता महसूस करने लगेंगे, ये आपके मानसिक वातावरण के बदलने की निशानी है। आप स्वतः ही कुछ अच्छा, कुछ रचनात्मक करने की सोचने लगेंगे। आप यहीं मत रुकना, वो करना शुरू करना जिसे करने की आवाज इस समय आपके अन्दर से आ रही है। ये जो भी होगा वो निश्चित ही आपको आत्मिक संतुष्टि देगा। ये आत्मिक संतुष्टि फिर वैसा ही कुछ अच्छा, रचनात्मक करने को प्रेरित करेगी और इस तरह आपका जीवन बेहतर, और बेहतर होता चला जाएगा।
तो आइए, एक बार फिर से अपना बीता कल चुनते हैं और, अपना आज और आने वाला कल बेहतर बनाते हैं।

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Rahul Hemraj

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Rajasthan ,  INDIA

दैनिक-नवज्योति में मासिक स्तम्भ के अतिरिक्त विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेखन। प्रत्येक रविवार को जिन्दगी से जुड़े सूक्ष्म महत्वपूर्ण विषयों पर कार्यशाला करता हूँ। जिन्दगी हर पल चकित करती है, उसी को और जानने-समझने की कोशिश ये सब करवाती है। 
भवन-निर्माण और ग्रेनाइट व्यवसाय जीवन को आसान बनाता है। ​

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