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VYANG .. विकास व्हाया नोटबंदी

विकास व्हाया नोटबंदी

विवेक रंजन श्रीवास्तव
ए १ , विद्युत मण्डल कालोनी , शिला कुन्ज
जबलपुर
मो ९४२५८०६२५२ , vivek1959@yahoo.co.in

मुझे नही पता कि नोट बंदी से देश को फायदा हुआ या नुकसान पर मुझे तो सीधे ही नगद दो लाख उननचास हजार का का फायदा हुआ , यह लिमिटेड फिगर इसलिये क्योकि ढ़ाई लाख का सरकारी फिगर था , बिना पूंछ पांछ के नगद जमा करने का . जिस एकमेव पत्नी को मैं अब तक केवल विवेक पति ही समझता था वह लखपती भी निकली . और हां जैसे आत्म कथाओ में घटना के बरसो बाद बड़े लोग तत्कालीन घटनाओ की वास्तविकता उजागर करते हैं , अब मुझे भी यह सत्य उद्घाटित करने में संकोच नही है कि हजार पांच सौ के पुराने नोटों की जो थोड़ी बहुत रकम रिजर्व बैंक नही पहुंच पाई है , उसमें से एक पांच सौ का नोट मेरे बेटे को कक्षा पांचवी में जिले में अव्वल आने पर इनाम में मिला नोट भी है , जिसे मेरी सुगढ़ भावुक पत्नी ने लिफाफे सहित भावनात्मक थाथी के रूप में संभाल कर रखा हुआ है , नोटबंदी में भी बैंक को वह नोट वापस नही दिया गया . क्योकि उसके लिये उस नोट का आर्थिक मूल्य , भावनात्मक्क मूल्य के सम्मुख नगण्य है . मैंने भी यह सोचकर इस मामले में पत्नी से मतभेद नही किया और अपने आप को समझा लिया कि किसी दिन यह नोट संग्रहण पुरानी डाक टिकिटो , सिक्को और अन्य नोटो के संग्रहो की तरह वैल्युएबल हो ही जायेगा .
जीडीपी , नोटबंदी वगैरह यूं तो अमृत्यसेन जैसो के ऐसे विषय रहे हैं . हमारे लिये ये ऐसे ही हैं जैसे आम जनता के लिये नई कविता . भूकम्प या बाढ़ से जैसे सेंसेक्स का उतार चढ़ाव प्रभावित होता है वैसे ही नोटबंदी से विकास और जी डी पी के प्रभाव को समझना केवल वित्त मंत्री और विपक्ष के बस में है , जो उसे अपने अपने तरह से समझ ही रहे हैं . हम क्यो अपना माथा पकायें . ये सब ऐसे मामले हैं , जिन पर नोबल वगैरह मिलते हैं . नोटबंदी के समय से इस सबके बावजूद भी व्हाट्सअप ने हर व्यक्ति को अर्थशास्त्री बना दिया है . सरल भाषा में हम आप को जी डी पी और जी एस टी समझाने ,राष्ट्र प्रेम से सराबोर "कुबेर शास्त्र " बाजार में दिखे तो विस्मित न होवें .
अस्तु मेरे जिज्ञासु मन ने पक्ष , विपक्ष के नेता जी से , सरकारी टी वी चैनल से , सरकार के समर्थन में खड़े निजी चैनल , सरकार समर्थित चैनल और विपक्ष में चिल्लाते टीवी चैनल् से विकास व्हाया नोटबंदी पर सवाल किये . जो जबाब मिले हैं कुछ इस तरह हैं . सबसे पहले मैने प्रश्न रखा कि क्या सचमुच नोट बंदी से देश को लाभ हुआ ? सरकार के मंत्री जी का उत्तर तय शुदा शब्दो में मुस्कराते हुये आया निसंदेह एक नही अनेक लाभ हैं ,जो लाभ हमने सोचे थे वे नही हुये तो क्या हुआ जो नही सोचे थे ऐसे ऐसे लाभ हुये हैं . होते जा रहे हैं , पहले से सब कुछ डिक्लेयर नही करना हमारी स्ट्रेटिजी थी , आगे आगे देखिये , अच्छे परिणाम आ रहे हैं .नोटबंदी को जनता का पूरा समर्थन मिला है , हम लगातार चुनाव जीत रहे हैं .
विपक्ष का उत्तर भी अप्रत्याशित नही था , यह पूरी तरह फ्लाप योजना थी , जनता का ध्यान मूल समस्याओ से भटकाने की कोशिश थी .विपक्षी दलो को बिना विश्वास में लिये हड़बड़ि में की गई गड़बड़ी थी यह योजना . इसकी हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज से या जे पी सी से जांच होनी चाहिये , हमें भरोसा है कि जब भी हम अगली बार सत्ता में आयेंगे तो नये नोट छापने के लिये हुये कागज सप्लाई में घोटाला पकड़ा जायेगा .
विपक्ष समर्थित टी वी चैनल ने आक्रामक तेवर में कहा कि यह एक एड़यंत्र था . सरकारी चैनल ने कुछ कहा नही केवल कुछ ऐसे आंकड़े दिखाये जिन्हें समझना मेरे बस की बात नही . सरकार समर्थित चैनल्स ने हास्य प्रोग्राम बनाकर कहा कि नोटबंदी से यह तो पता चला कि राहुल जी भी फटे जेब वाला कुर्ता पहनते हैं . सरकार के समर्थन में राग अलाप रहे चैनल्स ने ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग की जिनमें पत्रकार मौके पर था और खबर की पुष्टि की गई थी माइक एक पान वाले के मुंह पर था , पान वाले ने बताया कि नोटबंदी के समय कुछ लोगो ने पेटीएम वगैरह से पेमेंट किया था , पर अब सब कुछ पूर्ववत ढ़र्रे पर है , लोग उतना ही पान खा रहे हैं और नगद पेमेंट ही कर रहे हैं .
मुझे समझ आ गया कि विकास व्हाया नोटबंदी आ चुका है , जिन देखा तिन पाईंयां गहरे पानी पैठ .

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Vivek Ranjan Shrivastava

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Madhya Pradesh ,  INDIA

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