Call Us : (+91) 0755 4096900-06 - Mail : bloggerspark@scratchmysoul.com

Vivek Ranjan Shrivastava : Blogs

Blog

VYANG >>मिले दल मेरा तुम्हारा

मिले दल मेरा तुम्हारा

विवेक रंजन श्रीवास्तव
ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर जबलपुर
९४२५८०६२५२

मुझे कोई यह बताये कि जब हमारे नेता "घोड़े" नहीं हैं, तो फिर उनकी हार्स ट्रेडिंग कैसे होती है ?
जनता तो चुनावो में नेताओ को गधा मानकर "कोई नृप होय हमें का हानि चेरी छोड़ न हुई हैं रानी" वाले मनोभाव के साथ या फिर स्वयं को बड़ा बुद्धिजीवी और नेताओ से ज्यादा श्रेष्ठ मानते हुये ,मारे ढ़केले बड़े उपेक्षा भाव से अपना वोट देती आई है . ये और बात है कि चुने जाते ही , लालबत्ती और खाकी वर्दी के चलते वही नेता हमारा भाग्यविधाता बन जाता है और हम जनगण ही रह जाते हैं . यद्यपि जन प्रतिनिधि को मिलने वाली मासिक निधि इतनी कम होती है कि लगभग हर सरकार को ध्वनिमत से अपने वेतन भत्ते बढ़वाने के बिल पास करने पड़ते हैं , पर जाने कैसे नेता जी चुने जाते ही बहुत अमीर बन जाते हैं . पैसे और पावर ही शायद वह कारण हैं कि चुनावो की घोषणा के साथ ही जीत के हर संभव समीकरण पर नेता जी लोग और उनकी पार्टियां गहन मंथन करती दिखती है .चुपके चुपके "दिल मिले न मिले ,जो मिले दल मेरा तुम्हारा तो सरकार बने हमारी " के सौदे , समझौते होने लगते हैं , चुनाव परिणामो के बाद ये ही रिश्ते हार्स ट्रेडिंग में तब्दील हो सकने की संभावनाओ से भरपूर होते हैं .
"मेरे सजना जी से आज मैने ब्रेकअप कर लिया" वाले सेलीब्रेशन के शोख अंदाज के साथ नेता जी धुर्र विरोधी पार्टी में एंट्री ले लेने की ऐसी क्षमता रखते हैं कि बेचारा रंगबदलू गिरगिटान भी शर्मा जाये . पुरानी पार्टी आर्काईव से नेताजी के पुराने भाषण जिनमें उन्होने उनकी नई पार्टी को भरपूर भला बुरा कहा होता है , तलाश कर वायरल करने में लगी रहती है . सारी शर्मो हया त्यागकर आमआदमी की भलाई के लिये उसूलो पर कुर्बान नेता नई पार्टी में अपनी कुर्सी के पायो में कीलें ठोंककर उन्हे मजबूत करने में जुटा रहता है . ऐसे आयाराम गयाराम खुद को सही साबित करने के लिये खुदा का सहारा लेने या "राम" को भी निशाने पर लेने से नही चूकते . जनता का सच्चा हितैषी बनने के लिये ये दिल बदल आपरेशन करते हैं और उसके लिये जनता का खून बहाने के लिये दंगे फसाद करवाने से भी नही चूकते . बाप बेटे , भाई भाई , माँ बेटे , लड़ पड़ते हैं जनता की सेवा के लिये हर रिश्ता दांव पर लगा दिया जाता है . पहले नेता का दिल बदलता है , बदलता क्या है , जिस पार्टी की जीत की संभावना ज्यादा दिखती है उस पर दिल आ जाता है . फिर उस पार्टी में जुगाड़ फिट किया जाता है .प्रापर मुद्दा ढ़ूढ़कर सही समय पर नेता अपने अनुयायियो की ताकत के साथ दल बदल कर डालता है . वोटर का दिल बदलने के लिये बाटल से लेकर साड़ी , कम्बल , नोट बांटने के फंडे अब पुराने हो चले हैं . जमाना हाईटेक है , अब मोबाईल , लेपटाप , स्कूटी , साईकिल बांटी जाती है . पर जीतता वो है जो सपने बांट सकने में सफल होता है . सपने अमीर बनाने के , सपने घर बसाने के , सपने भ्रष्टाचार मिटाने के . सपने दिखाने पर अभी तक चुनाव आयोग का भी कोई प्रतिबंध नही है . तो आइये सच्चे झूठे सपने दिखाईये , लुभाईये और जीत जाईये . फिर सपने सच न कर पाने की कोई न कोई विवशता तो ब्यूरोक्रेसी ढ़ूंढ़ ही देगी . और तब भी यदि आपको अगले चुनावो में दरकिनार होने का जरा भी डर लगे तो निसंकोच दिल बदल लीजीयेगा , दल बदल कर लीजीयेगा . आखिर जनता को सपने देखने के लिये एक अदद नेता तो चाहिये ही , वह अपना दिल फिर बदल लेगी आपकी कुर्बानियो और उसूलो की तारीफ करेगी और फिर से चुन लेगी आपको अपनी सेवा करने के लिये . ब्रेक अप के झटके के बाद फिर से नये प्रेमी के साथ नया सुखी संसार बस ही जायेगा . दिल बदल बनाम दलबदल , लोकतंत्र चलता रहेगा .

Post your comment

About The Author

Photograph

Vivek Ranjan Shrivastava

Public & Government Service

Madhya Pradesh ,  INDIA

अभी बाकी है खुद को जानना ......

View More 

Vodafone

Recent Blogs By Author

Sony