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Book Review : Watan ko Naman (Hindi)

देश राग के गीत

आशा व आस्था के स्वर
"वतन को नमन' राष्ट्र चेतना व देश-प्रेम से ओत-प्रोत आशा और वि·श्वास से भरी सौ से भी अधिक छन्दबद्ध कविताओं व गीतों का एक अच्छा-खासा संकलन है। आज जबकि कविता के नाम पर इतना फालतू लिखा जा रहा हो; कविता को दुरूह से दुरूहतम करने की होड़-सी लगी हो; विचार कविता या अकविता की दुहाई देकर मुक्तछन्द कविता को छन्दमुक्त बना पद्य की शिष्टता को गद्य की भ्रष्टता में बदलने का एक नियोजित षड््यन्त्र चलाया जा रहा हो, ऐसे में सहज-सरल-सरस छन्दबद्ध रचनाएं एक सुखद अनुभूति की तरह प्रतीत होती हैं।
संकलन की अधिकांश रचनाएं गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित हैं। कोई लाग-लपेट नहीं है। कविताओं में एक सीधा-साधा-सच्चा सहज रंग है। लेकिन आलोचक की "निर्मम दृष्टि' से आकलन किया जाए तो बहुत सी रचनाओं में और अधिक परिष्कार की संभावना विद्यमान है। इस कारण रचनाओं में कहीं-कहीं पर्याप्त दंश का अभाव भी दिखता है। वैसे भी रचना को सहज रूप से पकाने का धैर्य लेखक में होना ही चाहिए। पुस्तक में पका-अधपका सब कुछ परोस देना न लेखक के लिए अच्छा है, न पाठकों के लिए। काव्य-संकलन में तो विशेष रूप से ऐसी सावधानी बरती ही जानी चाहिए। बहरहाल, देश के प्रति कवि की प्रगाढ़ आस्था, चिन्तन और भावों में राष्ट्रहित की झलक, देश की अधिकांश समस्याओं का आंकलन और अन्तत: सब कुछ अच्छा होने की आश कवि की मौलिक शक्ति है जो कि रचनाओं में यत्र-तत्र दृष्टिगोचर होती है। कवि ने धर्म जैसे गंभीर विषयों पर भी लेखनी चलाई है। धर्म के सम्बन्ध में मैत्री, भ्रांतियों की बात भी की है, तो उसके निर्विवादित स्वरूप को भी उजागर किया है-
"धर्म है शान्ति-सुख सर्जना के लिए
बन्धुतापूर्ण शुभ आचरण के लिए।'
ना कि लड़ने-झगड़ने कलह के लिए-
शत्रुतापूर्ण जीवन-हनन के लिए।
एकता- प्रेम-सद्भाव का हो वरण,
राष्ट्र-सम्मान औ उन्नयन के लिए।
इन पंक्तियों में "रामराज्य' की एक झलक देखी जा सकती है-
"हर नागरिक सुशील, सरल, बुद्धिमान हो,
भोजन-वसन, सुशिक्षा, सुरक्षा, मकान हो।
सबको मिले आजीविका, पर्याप्त आय हो,
कोई न वैर भाव हो, निष्पक्ष न्याय हो।'
"बम्बई-बम विस्फोट' नामक गीत में कवि द्वारा उठाया गया यह प्रश्न आज के सन्दर्भों में उचित है और आवश्यक भी-
"रो रहा है दिल जो बम्बई में हुआ फिर हादसा,
समझना मुश्किल है- बम का धर्म से क्या वास्ता?
सार रूप में कहा जाए "वतन को नमन' काव्य-संकलन का मूल स्वर कवि की इन पंक्तियों में निहित है-
है चार दिन जिन्दगी, हिलमिल के बिताएं
खुद भी उठें जमीन से, औरों को उठाएं।'
द नरेश शांडिल्य
पुस्तक का नाम - वतन को नमन (काव्य-संकलन)
रचनाकार - डा. चित्रभूषण श्रीवास्तव "विदग्ध'
पृष्ठ संख्या - 128, मूल्य - 150 रु.
प्रकाशक - विकास प्रकाशन, विवेक सदन, नर्मदागंज
मण्डला (म.प्र.)- 481661
दूरभाष: 0761 2662052, 9425806252

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Watan ko Naman (Hindi)
Category : History
Book Title : Watan ko Naman (Hindi)
Author : Prof. C.B. Shrivastava
Publication : Vikas Prakashan Mandla
Primary Language : Hindi

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