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Book Review : The Sherlockian

कौआ कान ले गया

व्यंग संग्रह
कौआ कान ले गया
व्यंगकार ....विवेक रंजन श्रीवास्तव
पृष्ठ : 96
मूल्य : 60रु.
प्रकाशक : सुकीर्ति प्रकाशन
आईएसबीएन : 81-88796-184-5
प्रकाशित : जनवरी ०१, २००९
पुस्तक क्रं : 7236
मुखपृष्ठ : अजिल्द
समीक्षा ..हरि जोशी
सारांश:
हम तो बोलेंगे ही, सुनो ना सुनो, यह बयान किसी कवि सम्मेलन पर नहीं है ना ही यह संसद की कार्यवाही का वृतांत है। यह सीधी सी बात है, कलम के साधकों की जो लगातार लिख रहे हैं, अपना श्रम, समय, शक्ति लगाकर अपने ही व्यय पर किताबों की शक्ल में छापकर ‘सच’ को बाँट रहे हैं। कोई सुने, पढ़े ना पढ़े, लेखक के अंदर का रचनाकार अभिव्यक्ति को विवश है। इस विवशता में पीड़ा है, अंतर्द्वद है, समाज की विषमता, दोगलेपन पर प्रहार है। परिवेश के अनुभवों से जन्मी यह रचना प्रक्रिया एक निरंतर कर्म है। विवेक जी के व्यंग्य लेख लगातार विभिन्न पत्र पत्रिकाओं, इंटरनेट पर ब्लाग्स में प्रकाशित होते है, वे कहते हैं ,देश विदेश से पाठकों के, समीक्षकों के पत्र प्रतिक्रियायें मिलती हैं, तो लगता है, कोई तो है, जो सुन रहा है। कहीं तो अनुगूंज है। इससे उनके लेखन कर्म को ऊर्जा मिलती है। समय-समय पर छपे अनेक व्यंग लेखों के संग्रह ‘रामभरोसे’ को व्यापक प्रतिसाद मिला। उसे अखिल भारतीय दिव्य अलंकरण भी मिला। ये लेख कुछ मनोरंजन, कुछ वैचारिक सत्य है। आपको सोचने पर विवश करते हैं . प्रत्येक व्यंग कही गुदगुदाते हुये शुरू होता है , समाज की कुप्रथाओ पर प्रहार करता है और अंत में एक शिक्षा देते हुये , संभावित समाधान बताते हुये समाप्त होता है . बहुत सीमित शब्दों में अपनी बात इस सुंदर शैली में कह पाना विवेक जी की विशेषता है .
पुस्तक प्रकाशन के क्षेत्र में लेखकीय शोषण, पाठकहीनता, एवं पुस्तकों की बिक्री की जो वर्तमान स्थितियां है, वे हम सबसे छिपी नहीं है, पर समय रचनाकारों के इस सारस्वत यज्ञ का मूल्यांकन करेगा, इसी आशा के साथ, कोई ४५ व्यंग लेखो का यह संग्रह पाठक को बांधे रखता है . दैनंदनी जीवन की वे अनेक विसंगतियां जिन्हें देखकर भी हम अनदेखा कर देते हैं , विवेक जी की नजरो से बच नही पाई हैं , उनका इस धर्म में दीक्षित होना सुखद है . पुस्तक जितनी बार पढ़ी जावे नये सिरे से आनंद देती है .
समीक्षा ..हरि जोशी

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The Sherlockian
Category : Mystery
Book Title : The Sherlockian
Author : Graham Moore
Publication :
Primary Language : English

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