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एक जूते कि आपबीती.....

एक जूते कि आपबीती.....

नमस्कार पाठकगण,
मैं अपने मालिक के दायें पैर का एक साधारण सा जूता हूँ। फ़िलहाल अस्पताल के बिस्तर पर आराम फरमा रहा हूँ। बोर हो रहा था तो सोचा आपको अपनी आपबीती बता दूँ। इस अस्पताल में आने के पहले मेरा जीवन बड़ा ही सुखद था। मेरे मालिक मेरा बहुत ध्यान रखते थे। पर एक दिन हुआ यूँ कि मेरे मालिक और उनके कुछ दोस्तों ने "श्री गोपाल मंदिर" से "श्री चिंतामण" तक कि पैदल यात्रा का प्रोग्राम बनाया।

अगले दिन मेरे मालिक तथा उनके पाँच दोस्त सोनल, आयशा, विकास, मयंक एवं परिधि मैडम और उनके साथ मेरी बिरादरी के दस और लोग निकल पड़े पैदल "श्री चिंतामण" कि ओर। यात्रा कि शुरुआत बहुत ही आनंदायी थी। मैं ओर मेरा भाई (मालिक के बायें पैर का जूता) बड़े प्रसन्न थे। पर यह ख़ुशी ज्यादा देर कहाँ टिकने वाली थी। थोडा आगे जाने पर सोनल मैडम के जूते ने मुझे हल्का सा धक्का मारा, पर मैंने इसे हल्के में लिया और चुप रहा। थोडा आगे जाने पर फिर मुझे धक्का मारा, और इस बार जूता परिधि मैडम के दायें पैर का था। अब मुझे थोडा गुस्सा आ रहा था, क्योंकि मेरे तीन टाँके इन धक्को के कारण निकल गए थे, पर में फिर भी मालिक के कारण चुप रहा। थोडा और आगे जाने पर आयशा मैडम की बायें पैर के जूते ने मुझ पर हमला बोला, हमला इतना ज़ोरदार था कि इस हमले से मेरे आठ से दस टाँके निकल गए और मालिक कि एडी अर्थात मेरे पिछले भाग से मेरा तलवा अलग होने लगा। इस बार मुझे बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था, पर में कुछ आगे करता इसके पहले ही तीनों मैडम के जूतों ने मुझ पर एक साथ आक्रमण कर दिया। इस भारी-भरकम आक्रमण को मैं सह नहीं पाया और बुरी तरह घायल होकर बेहोश हो गया..........

.........और जब आँख खुली तो ख़ुद को अख़बार में लिपटा पाया। मालिक मुझे अख़बार में लपेट कर जूतों के अस्पताल में लेकर आये थे। बाहर से यह अस्पताल कुछ ख़ास नहीं था, शायद सरकारी अस्पताल था। अस्पताल के अन्दर जाते ही हमें बूढ़े और अनुभवी डाक्टर, डाक्टर दीनदयाल काका मिलें। उन्होंने मुझे फ़ौरन आई. सी. यू. में भर्ती करने को कहा। इसके बाद मालिक ने एक छोटा सा फॉर्म भरकर मुझे आई. सी. यू. में भर्ती कर दिया। आई. सी. यू. में और भी कई सारे जूते थे। सब यहाँ पहुँचने की अपनी-अपनी आपबीती सुना रहे थे। एक जूता बोल रहा था कि उसके मालिक का एक्सिडेंट हुआ था, दूसरा बोल रहा था कि उसका मालिक एक इंजिनियर स्टुडेंट है, उसकी इतनी भाग दौड़ के कारण उसकी यह हालत हुई है। अंत में मेरी बारी आई, पर में क्या बताता, मैं तो यहाँ लेडिस लोगों से पिटकर पहुँचा था। इसलिए में चुप रहा और याददाश्त ग़ुम होने का बहाना बना दिया।


कुछ दिनों बाद मुझे आई. सी. यू. से जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। जनरल वार्ड कि हालत बहुत ही ख़राब थी। यहाँ बहुत से जूतों-चप्पलों कि भीड़ थी। एक बिस्तर पर तीन-तीन, चार-चार जूते पड़े हुए थे। चारों तरफ़ गन्दगी और बहुत शोर-शराबा था। मुझे तो यहाँ घुटन सी होने लग गयी थी। बाद में मालिक ने मुझे वी. आई. पी. वार्ड में शिफ़्ट करवा दिया। वी. आई. पी. वार्ड बहुत ही शांत था। यहाँ बिस्तर बड़े और साफ़-सुथरे थे तथा एक बिस्तर पर केवल एक ही जूता था। इस वी. आई. पी. वार्ड में बड़े-बड़े लोगों के जूते थे, जैसे- मंत्री, संत्री, अफ़सर इत्यादि। सभी जूते बड़े अकड़ के बैठे थे। वी. आई. पी. वार्ड में हमें सारी सुख-सुविधा थी, जैसे- ठण्ड से बचने के लिये हीटर, नहाने के लिये गर्म पानी और एक अपना निजी वार्ड बॉय।


तो यह थी मेरी इस अनोखे अस्पताल मैं पहुँचने कि कहानी, ख़ैर अब किसी तरह दिन गुज़र रहे हैं। मेरे दाँयी तरफ़ किसी नेता का जूता है, जो हमेशा अपनी और अपनी पार्टी कि ही तारीफ़ करता रहता है और दूसरी तरफ़ किसी हाई क्लास सोसाइटी कि कोई महान हस्ती है, जो अपनी ही अकड़ में रहता है और मुझ जैसे साधारण जूते से बात नहीं करता। इस तरह में यहाँ बैठे-बैठे बोर हो रहा हूँ। वैसे डाक्टर छोटू, जो सिर्फ बारह वर्ष के है और जिन्होंने आई. आई. टी. बोम्बे से छह महीने का डिप्लोमा कोर्स किया है ने मेरे मालिक से कहा है कि वो मुझे तीन-चार दिनों में घर ले जा सकते हैं। अब बस बैठा-बैठा दिन गिन रहा हूँ कि कब मेरे डिस्चार्ज होने का दिन आये और में अपने घर जा सकूँ, अपने भाई से मिलकर उसके साथ ढेर सारी बातें कर सकूँ।

:-) :-) :-)

Ur`s
Abhay

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Abhaykirti Ramawat

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Madhya Pradesh ,  INDIA


I am a student. Pursuing post graduation in Pharmaceutical Chemistry from Ujjain (MP).  I am an optimistic team worker, friendly, flexible. A person with creative mind, who always wants to do something new and challenging work.

I have basic knowledge of photoshop and I am very much comfortable in working with net. I read books and write blogs. Other than these I take interest in Bicycling, Movies, Photography, Cricket and Making Ice Cream.

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